धर्मांतरण पर 10 साल की सजा! छत्तीसगढ़ विधानसभा में बड़ा फैसला, विपक्ष बाहर"

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026, अवैध धर्मांतरण पर सख्त कानून, विरोध में विपक्ष का बहिष्कार, सदन में सियासी तूफान रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार का दिन जोरदार राजनीतिक टकराव का गवाह बना. राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 पेश कर अवैध धर्मांतरण, प्रलोभन और शादी के जरिए धर्म परिवर्तन पर कड़ा शिकंजा कसने का संदेश दिया. जैसे ही विधेयक सदन में आया, विपक्ष ने इसकी प्रक्रिया और प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया. उसके बाद विपक्ष ने आज सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया. हालांकि विपक्ष की अनुपस्थिति में ही सदन में विधेयक पर विस्तृत चर्चा की गई.सदन में हंगामा और विपक्ष का बहिष्कारविधेयक के सदन में पेश होते ही विपक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई. विपक्षी दलों का तर्क था कि इस विधेयक की बारीकियों और इसके संभावित प्रभावों की समीक्षा की जानी चाहिए, इसलिए इसे विधानसभा की प्रवर समिति के पास भेजा जाना चाहिए. हालांकि, आसंदी द्वारा विपक्ष की इस आपत्ति को खारिज कर दिया गया. आसंदी के इस फैसले से नाराज होकर विपक्ष ने एकजुट होकर आज दिनभर की सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करने का निर्णय लिया और सदन से विधेयक के तहत अवैध धर्मांतरण को विस्तृत रूप से परिभाषित किया गया है, जिसमें किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध मनोवैज्ञानिक दबाव या शारीरिक बल (प्रपीड़न) के माध्यम से धर्म बदलने के लिए मजबूर करना शामिल है. कानून में "प्रलोभन" के दायरे को भी काफी बढ़ाया गया है. अब नकद उपहार, रोजगार का वादा, मुफ्त शिक्षा, बेहतर जीवनशैली का प्रलोभन या किसी धर्म के रीति-रिवाजों को दूसरे के विरुद्ध गलत तरीके से प्रस्तुत करना भी अपराध की श्रेणी में आएगा. विशेष रूप से, यदि कोई व्यक्ति अपने पैतृक धर्म या आस्था में वापस आता है, तो इसे इस अधिनियम के तहत धर्मांतरण नहीं माना जाएगा.धर्मांतरण की अनिवार्य प्रक्रिया और पूर्व घोषणानए नियमों के अनुसार, अब धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया काफी सख्त होगी. कोई भी व्यक्ति जो अपना धर्म बदलना चाहता है, उसे निर्धारित प्रारूप में उस क्षेत्र के सक्षम प्राधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत अधिकारी) को एक घोषणा पत्र सौंपना होगा. इसके अतिरिक्त, धर्मांतरण का अनुष्ठान कराने वाले व्यक्ति (जैसे पुजारी, मौलवी या फादर) को भी प्रस्तावित तिथि से पहले इसकी सूचना देनी होगी. सक्षम प्राधिकारी इस सूचना को अपनी वेबसाइट और स्थानीय कार्यालयों में 7 दिनों के भीतर सार्वजनिक करेंगे, जिसके बाद 30 दिनों तक किसी भी व्यक्ति को लिखित आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार होगा.विवाह और धर्मांतरण पर विशेष प्रावधानविधेयक में केवल धर्मांतरण के उद्देश्य से किए जाने वाले विवाहों पर कड़ा रुख अपनाया गया है. यदि अलग-अलग धर्मों के व्यक्ति विवाह करना चाहते हैं, तो उन्हें प्रस्तावित विवाह से 60 दिन पहले सक्षम प्राधिकारी को सूचित करना अनिवार्य होगा. प्राधिकारी इस बात की जांच करेंगे कि क्या विवाह का मुख्य उद्देश्य अवैध धर्मांतरण है. कानून स्पष्ट करता है कि केवल विवाह करना किसी भी धार्मिक धर्मांतरण को वैध बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा और इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना ही होगा.सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधानअवैध धर्मांतरण के दोषियों के लिए दंड के बेहद कड़े प्रावधान किए गए हैं. धारा 3 के उल्लंघन पर सामान्यतः 7 से 10 वर्ष तक के कारावास और कम से कम 5 लाख रुपये के जुर्माने की व्यवस्था है. हालांकि, यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, या अनुसूचित जाति/जनजाति से संबंधित है, तो कारावास की अवधि 10 से 20 वर्ष तक हो सकती है और जुर्माना 10 लाख रुपये से कम नहीं होगा. सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और भी गंभीर है, जिसमें दोषी को आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है. इसके अलावा, न्यायालय पीड़ित को 10 लाख रुपये तक का उचित प्रतिकर (मुआवजा) देने का निर्देश भी दे सकता है.पारदर्शिता और जवाबदेही के नए मानककानून के क्रियान्वयन के लिए विशेष न्यायालयों और विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की जाएगी ताकि मामलों का त्वरित निस्तारण हो सके. धर्मांतरण में सहायता करने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं को अपना पंजीकरण कराना होगा और प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर अपनी गतिविधियों और प्राप्त निधियों (घरेलू या विदेशी) की वार्षिक रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारी को सौंपनी होगी. साक्ष्य का भार (Burden of Proof) उस व्यक्ति पर होगा जिसने धर्मांतरण कर

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