कवर्धा बिजली विभाग में 50 लाख से ज्यादा के गबन का आरोप, शिकायत के बाद भी एक महीने से FIR दर्ज नहीं

कबीरधाम (कवर्धा): जिले के बिजली विभाग में लाखों रुपये के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि विभाग के एक कर्मचारी ने उपभोक्ताओं से बिजली बिल की राशि वसूली, लेकिन उसे कंपनी के बैंक खाते में जमा नहीं कराया। हैरानी की बात यह है कि विभाग द्वारा पुलिस को शिकायत देने के एक महीने बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, जिससे विभाग की निगरानी व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक मामला Chhattisgarh State Power Distribution Company Limited के रवेली वितरण केंद्र का है। यहां पदस्थ कार्यालय सहायक श्रेणी-3 मनोज कुमार साहू पर उपभोक्ताओं से बिजली बिल की राशि वसूलकर उसे कंपनी के बैंक खाते में जमा न करने का आरोप लगा है।

विभागीय दस्तावेजों के अनुसार आरोपी कर्मचारी ने 07 जुलाई 2014 से 25 जनवरी 2023 के बीच उपभोक्ताओं से बिजली बिल की रकम वसूली, लेकिन उसका पूरा हिसाब कंपनी के बैंक खातों में जमा नहीं कराया।

जांच के दौरान बैंक मिलान और लेखा परीक्षण में यह भी सामने आया कि कई मामलों में उपभोक्ताओं से राशि तो ली गई, लेकिन वह बैंक जमा के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही थी। दस्तावेजों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2020-21 में करीब 33 लाख 79 हजार 723 रुपये, वित्तीय वर्ष 2022-23 में लगभग 14 लाख 63 हजार 239 रुपये और विशेष अभियान के दौरान करीब 4 लाख 92 हजार 111 रुपये की राशि का हिसाब नहीं मिल पाया है। इस तरह कुल मिलाकर 50 लाख रुपये से ज्यादा के गबन की आशंका जताई जा रही है।

मामले को लेकर विभाग के सहायक अभियंता द्वारा पिपरिया थाना में लिखित आवेदन देकर आरोपी कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। विभाग ने संबंधित कर्मचारी को निलंबित भी कर दिया है, लेकिन आवेदन दिए करीब एक महीना बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है

इस संबंध में कार्यपालन अभियंता जीएस फ्लोरा ने बताया कि रवेली वितरण केंद्र में राजस्व संग्रहण की राशि बैंक में जमा नहीं होने का मामला सामने आया है। प्रथम दृष्टया कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है और जांच अधिकारी नियुक्त कर जांच कराई जा रही है।

वहीं एएसपी पुष्पेन्द्र बघेल ने कहा कि पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की ओर से शिकायत मिली है। विभाग से जांच रिपोर्ट मांगी गई है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतने लंबे समय तक लाखों रुपये का गबन कैसे होता रहा और विभागीय अधिकारियों को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी। साथ ही शिकायत के बावजूद एक महीने से एफआईआर दर्ज न होना भी कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है।

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