छत्तीसगढ़ विधानसभा में धान खरीदी पर घमासान: बस्तर में कांकेर सबसे आगे, मंत्री के जवाब से नाराज़ विपक्ष का वॉकआउट

  • रायपुर: Chhattisgarh Legislative Assembly के बजट सत्र में सोमवार को धान खरीदी और धान उठाव का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। कांग्रेस विधायक Lakheshwar Baghel ने वर्ष 2025-26 के लिए बस्तर संभाग में धान खरीदी की स्थिति को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि बस्तर संभाग के जिलों में कितने किसान पंजीकृत हैं, धान खरीदी का लक्ष्य क्या तय किया गया था और वास्तविक उपलब्धि कितनी रही।

    साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि पहली और दूसरी किस्त में कितने किसानों ने धान बेचा और कितने किसान ऐसे रहे जो धान नहीं बेच पाए।

    जिलावार जानकारी की मांग

    विधायक Lakheshwar Baghel ने सरकार से धान खरीदी और धान उठाव की जिलावार जानकारी देने की मांग की, ताकि बस्तर संभाग में खरीदी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। पूरक प्रश्न में उन्होंने पूछा कि धान खरीदी के बाद कस्टम मिलरों और परिवहनकर्ताओं द्वारा अब तक कितना धान उठाया गया है और जिलों में उठाव की क्या स्थिति है।

    44 हजार से ज्यादा किसान धान बेचने नहीं पहुंचे

    खाद्य मंत्री Dayaldas Baghel ने यह भी बताया कि 44,612 किसान धान खरीदी केंद्रों में धान बेचने ही नहीं पहुंचे। उनका कहना था कि जो किसान धान लेकर खरीदी केंद्रों तक आए, उनका धान खरीदा गया है।

    विपक्ष ने उठाए कई सवाल

    मंत्री के जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने सरकार से पूछा कि कितने किसानों से रकबा समर्पण कराया गया और उनमें से कितने मामलों में किसानों पर दबाव डाला गया। उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीदी के नाम पर किसानों के साथ अन्याय हो रहा है।

    वहीं विधायक Kawasi Lakhma ने कहा कि कई किसानों को टोकन मिलने के बावजूद धान बेचने का मौका नहीं मिला। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जिन किसानों का धान नहीं खरीदा गया और जिन पर कर्ज है, उनके लिए सरकार क्या कदम उठाएगी—क्या उनका धान खरीदा जाएगा या कर्ज माफ किया जाएगा।

    तीखी बहस के बाद विपक्ष का वॉकआउट

    धान खरीदी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सदन में तीखी बहस हुई। विपक्ष ने मंत्री के जवाब को असंतोषजनक बताते हुए इसे किसानों के साथ अन्याय करार दिया। अंततः कांग्रेस विधायकों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया, जिससे धान खरीदी का मुद्दा विधानसभा में और ज्यादा गरमा गया।

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