भारत का उत्थान अपनी ताकत से तय होगा, दूसरों की गलतियों से नहीं: रायसीना डायलॉग में बोले एस. जयशंकर

नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 के दौरान भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने स्पष्ट कहा कि भारत का उत्थान उसकी अपनी ताकत और क्षमताओं से तय होगा, न कि किसी दूसरे देश की गलतियों से। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति की दिशा साफ है और इसे रोका नहीं जा सकता।

जयशंकर ने यह बात उस समय कही जब सम्मेलन के दौरान अमेरिका के उप-विदेश सचिव Christopher Landau ने भारत के साथ आर्थिक संबंधों को लेकर बयान दिया था कि अमेरिका भारत के साथ वही गलतियां नहीं दोहराएगा जो उसने दो दशक पहले चीन के साथ की थीं। जयशंकर ने लैंडाउ का नाम लिए बिना कहा कि किसी भी देश की प्रगति उसकी अपनी ताकत से तय होती है।

इस बयान के बाद भारत में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। Indian National Congress ने केंद्र की Bharatiya Janata Party सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे ‘अपमानजनक’ बयानों पर सरकार को कड़ा रुख अपनाना चाहिए।

रायसीना डायलॉग के दौरान ‘समुद्र का हृदय: हिंद महासागर का भविष्य’ विषय पर चर्चा करते हुए जयशंकर ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र एक ऐसा एकीकृत इकोसिस्टम है जो उपनिवेशकाल के बाद फिर से आकार ले रहा है। उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में संपर्क और सहयोग को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है, ताकि पूर्व और पश्चिम दोनों क्षेत्रों को जोड़ा जा सके।

चर्चा में श्रीलंका, मॉरिशस और सेशेल्स के विदेश मंत्रियों ने भी भाग लिया। श्रीलंका के विदेश मंत्री Vijitha Herath ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) के ढांचे को मजबूत किया जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार लागू किया जाना जरूरी है।

वहीं मॉरिशस के विदेश मंत्री Dhananjay Ramful ने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति तेजी से बदल रही है और हिंद महासागर क्षेत्र इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है।

सेशेल्स के विदेश मंत्री Barry Faure ने भी क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में देशों को मिलकर काम करना होगा।

तीन दिवसीय 11वां Raisina Dialogue 2026 5 मार्च से नई दिल्ली में शुरू हुआ है। यह सम्मेलन जियोपॉलिटिक्स और जियो-इकॉनॉमिक्स पर भारत का सबसे बड़ा वैश्विक मंच माना जाता है, जिसमें दुनिया भर के नीति-निर्माता और विशेषज्ञ हिस्सा लेते हैं।

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