छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से अवैध अफीम की खेती का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के ग्राम समोदा में शिवनाथ नदी के किनारे मक्के की फसल की आड़ में बड़े पैमाने पर अफीम उगाई जा रही थी। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए लगभग डेढ़ से दो एकड़ जमीन पर फैली इस अवैध फसल का खुलासा किया है। इस मामले के सामने आने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल रहा है।जानकारी के अनुसार पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि समोदा गांव में मक्के की खेती के बीच अफीम की अवैध खेती की जा रही है। सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर खेतों की जांच की। जांच के दौरान मक्के के पौधों के बीच बड़ी मात्रा में अफीम की फसल पाई गई। अधिकारियों ने ड्रोन कैमरे की मदद से पूरे खेत का सर्वे किया और इसकी तस्वीरें व वीडियो भी सामने आए, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के नेता विनायक ताम्रकर का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विवाद बढ़ने के बाद भाजपा ने भी कार्रवाई करते हुए विनायक ताम्रकर को पार्टी से निलंबित कर दिया है। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उनके कथित व्यवहार से पार्टी की छवि धूमिल हुई है, इसलिए उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है।मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौके पर पहुंचे और खेत का निरीक्षण किया। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीर बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में इस तरह के अवैध कारोबार राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुर्ग को पहले एजुकेशन हब के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब यह नशे के कारोबार का केंद्र बनता जा रहा है।वहीं दूसरी ओर भाजपा नेता विनायक ताम्रकर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। ताम्रकर का दावा है कि जिस जमीन की बात की जा रही है वह उनकी निजी जमीन नहीं है और उन्हें अफीम की खेती के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उनका कहना है कि उन्होंने जो जमीन किसी को उपयोग के लिए दी थी, उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।फिलहाल पुलिस और प्रशासन ने मौके से एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अवैध अफीम की खेती के पीछे कौन लोग शामिल हैं और क्या इसका संबंध किसी बड़े नेटवर्क से है।इस घटना के बाद दुर्ग जिले में अवैध नशे के कारोबार को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं और प्रशासन पर भी कार्रवाई तेज करने का दबाव बढ़ गया है।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से अवैध अफीम की खेती का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के ग्राम समोदा में शिवनाथ नदी के किनारे मक्के की फसल की आड़ में बड़े पैमाने पर अफीम उगाई जा रही थी। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए लगभग डेढ़ से दो एकड़ जमीन पर फैली इस अवैध फसल का खुलासा किया है। इस मामले के सामने आने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल रहा है।
जानकारी के अनुसार पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि समोदा गांव में मक्के की खेती के बीच अफीम की अवैध खेती की जा रही है। सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर खेतों की जांच की। जांच के दौरान मक्के के पौधों के बीच बड़ी मात्रा में अफीम की फसल पाई गई। अधिकारियों ने ड्रोन कैमरे की मदद से पूरे खेत का सर्वे किया और इसकी तस्वीरें व वीडियो भी सामने आए, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के नेता विनायक ताम्रकर का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विवाद बढ़ने के बाद भाजपा ने भी कार्रवाई करते हुए विनायक ताम्रकर को पार्टी से निलंबित कर दिया है। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उनके कथित व्यवहार से पार्टी की छवि धूमिल हुई है, इसलिए उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौके पर पहुंचे और खेत का निरीक्षण किया। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीर बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में इस तरह के अवैध कारोबार राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुर्ग को पहले एजुकेशन हब के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब यह नशे के कारोबार का केंद्र बनता जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर भाजपा नेता विनायक ताम्रकर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। ताम्रकर का दावा है कि जिस जमीन की बात की जा रही है वह उनकी निजी जमीन नहीं है और उन्हें अफीम की खेती के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उनका कहना है कि उन्होंने जो जमीन किसी को उपयोग के लिए दी थी, उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन ने मौके से एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अवैध अफीम की खेती के पीछे कौन लोग शामिल हैं और क्या इसका संबंध किसी बड़े नेटवर्क से है।
इस घटना के बाद दुर्ग जिले में अवैध नशे के कारोबार को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं और प्रशासन पर भी कार्रवाई तेज करने का दबाव बढ़ गया है।
Your email address will not be published. Required fields are marked *