तेजपुर (असम): असम के कार्बी आंगलोंग जिले में गुरुवार रात भारतीय वायु सेना का एक Su-30 MKI फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में विमान में सवार दो पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद एक बार फिर पूर्वोत्तर भारत में बार-बार होने वाले सैन्य विमान हादसों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।इंडियन एयर फोर्स के पूर्व ग्रुप कैप्टन मोहंतो पंगिन पाओ ने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्से, खासकर अरुणाचल प्रदेश, बेहद चुनौतीपूर्ण उड़ान परिस्थितियों वाले इलाके हैं। उन्होंने बताया कि लगातार होने वाले विमान हादसों की वजह से कुछ विशेषज्ञ इस क्षेत्र की तुलना दुनिया के रहस्यमयी “बरमूडा ट्रायंगल” से करते हैं।पूर्व ग्रुप कैप्टन पाओ के मुताबिक, पूर्वी हिमालय क्षेत्र में मौसम बहुत तेजी से बदलता है। कुछ ही मिनटों में साफ आसमान घने बादलों और भारी बारिश में बदल सकता है। इसके अलावा घने जंगल, संकरी घाटियां और ऊंचे-खड़े पहाड़ पायलटों के लिए नेविगेशन को बेहद मुश्किल बना देते हैं। ऐसे हालात में विशेष रूप से नए पायलटों के लिए जोखिम और बढ़ जाता है।उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के कारण कई बार विमान गहरी घाटियों में फंस सकते हैं, जहां मुड़ने या सुरक्षित निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती। अचानक मौसम बदलने पर दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।पाओ ने इस क्षेत्र में उड़ान भरने वाले कुछ विमानों में इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ELT) के न होने या खराब होने पर भी चिंता जताई। यह डिवाइस विमान दुर्घटनाग्रस्त होने पर सैटेलाइट के जरिए तुरंत संकट संकेत भेजता है, जिससे बचाव दल को मलबे का पता लगाने में मदद मिलती है। उन्होंने बताया कि कई बार इन उपकरणों के ठीक से काम न करने की वजह से घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में मलबा खोजने में कई दिन लग जाते हैं।उन्होंने पूरे पूर्वोत्तर भारत में एविएशन सेफ्टी ऑडिट कराने की भी मांग की है, ताकि एयरपोर्ट और हेलीपैड पर मौजूद सुरक्षा व्यवस्था, फायर टेंडर, एम्बुलेंस, प्रशिक्षित बचाव दल और अन्य आपातकालीन सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया जा सके।गौरतलब है कि पिछले एक दशक में इस क्षेत्र में कई विमान दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2019 में जोरहाट से उड़ान भरने वाला भारतीय वायु सेना का An-32 ट्रांसपोर्ट विमान अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें सवार सभी 13 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं 2017 में तेजपुर के पास एक Su-30MKI फाइटर जेट ट्रेनिंग मिशन के दौरान क्रैश हो गया था, हालांकि उस समय दोनों पायलट सुरक्षित बच गए थे।लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत में उड़ान सुरक्षा को और मजबूत बनाने तथा आधुनिक तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने की जरूरत है।
तेजपुर (असम): असम के कार्बी आंगलोंग जिले में गुरुवार रात भारतीय वायु सेना का एक Su-30 MKI फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में विमान में सवार दो पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद एक बार फिर पूर्वोत्तर भारत में बार-बार होने वाले सैन्य विमान हादसों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
इंडियन एयर फोर्स के पूर्व ग्रुप कैप्टन मोहंतो पंगिन पाओ ने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्से, खासकर अरुणाचल प्रदेश, बेहद चुनौतीपूर्ण उड़ान परिस्थितियों वाले इलाके हैं। उन्होंने बताया कि लगातार होने वाले विमान हादसों की वजह से कुछ विशेषज्ञ इस क्षेत्र की तुलना दुनिया के रहस्यमयी “बरमूडा ट्रायंगल” से करते हैं।
पूर्व ग्रुप कैप्टन पाओ के मुताबिक, पूर्वी हिमालय क्षेत्र में मौसम बहुत तेजी से बदलता है। कुछ ही मिनटों में साफ आसमान घने बादलों और भारी बारिश में बदल सकता है। इसके अलावा घने जंगल, संकरी घाटियां और ऊंचे-खड़े पहाड़ पायलटों के लिए नेविगेशन को बेहद मुश्किल बना देते हैं। ऐसे हालात में विशेष रूप से नए पायलटों के लिए जोखिम और बढ़ जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के कारण कई बार विमान गहरी घाटियों में फंस सकते हैं, जहां मुड़ने या सुरक्षित निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती। अचानक मौसम बदलने पर दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।
पाओ ने इस क्षेत्र में उड़ान भरने वाले कुछ विमानों में इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ELT) के न होने या खराब होने पर भी चिंता जताई। यह डिवाइस विमान दुर्घटनाग्रस्त होने पर सैटेलाइट के जरिए तुरंत संकट संकेत भेजता है, जिससे बचाव दल को मलबे का पता लगाने में मदद मिलती है। उन्होंने बताया कि कई बार इन उपकरणों के ठीक से काम न करने की वजह से घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में मलबा खोजने में कई दिन लग जाते हैं।
उन्होंने पूरे पूर्वोत्तर भारत में एविएशन सेफ्टी ऑडिट कराने की भी मांग की है, ताकि एयरपोर्ट और हेलीपैड पर मौजूद सुरक्षा व्यवस्था, फायर टेंडर, एम्बुलेंस, प्रशिक्षित बचाव दल और अन्य आपातकालीन सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया जा सके।
गौरतलब है कि पिछले एक दशक में इस क्षेत्र में कई विमान दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2019 में जोरहाट से उड़ान भरने वाला भारतीय वायु सेना का An-32 ट्रांसपोर्ट विमान अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें सवार सभी 13 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं 2017 में तेजपुर के पास एक Su-30MKI फाइटर जेट ट्रेनिंग मिशन के दौरान क्रैश हो गया था, हालांकि उस समय दोनों पायलट सुरक्षित बच गए थे।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत में उड़ान सुरक्षा को और मजबूत बनाने तथा आधुनिक तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने की जरूरत है।
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