बलौदाबाजार में क्राइम कंट्रोल पर पुलिस का मंथन, 8 घंटे चली मैराथन समीक्षा बैठक

बलौदाबाजार: जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से पुलिस विभाग ने एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की। पुलिस कार्यालय के सभा कक्ष में आयोजित इस बैठक में जिले के सभी थाना और चौकी प्रभारियों के साथ राजपत्रित अधिकारी मौजूद रहे। करीब 8 घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में अपराध नियंत्रण, विवेचना की गुणवत्ता, लंबित मामलों के निराकरण और प्रभावी पुलिसिंग को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि गंभीर और संवेदनशील अपराधों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। किसी भी प्रकरण की जांच करते समय साक्ष्यों का संकलन पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ किया जाए। गवाहों के बयान, तकनीकी साक्ष्य और कानूनी प्रावधानों का सही तरीके से पालन करने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों को बताया गया कि मजबूत साक्ष्य और गुणवत्तापूर्ण जांच के आधार पर ही अदालत में अपराधियों को सजा दिलाना संभव होता है। साथ ही गंभीर मामलों में थाना प्रभारियों को स्वयं जिम्मेदारी लेते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच की निगरानी करने के लिए कहा गया।

समीक्षा बैठक में आदतन अपराधियों, गुंडा तत्वों, निगरानी बदमाशों और फरार वारंटियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। पुलिस अधिकारियों को कहा गया कि ऐसे अपराधियों की नियमित निगरानी की जाए और उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर खुफिया तंत्र को सक्रिय रखने पर भी जोर दिया गया, ताकि संदिग्ध गतिविधियों की समय रहते जानकारी मिल सके और त्वरित कार्रवाई की जा सके।

बैठक में अवैध मादक पदार्थों, जुआ-सट्टा और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि ऐसे मामलों में लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई की जाए। गांजा और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही जब्त किए गए मादक पदार्थों और अवैध शराब के नष्टीकरण की प्रक्रिया भी जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए।

इसके अलावा बैठक में लंबित अपराध, चालान, मर्ग, शिकायतों और न्यायालयीन प्रकरणों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द निपटाया जाए। आम लोगों की शिकायतों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि किसी भी व्यक्ति को न्याय के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।

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