छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की चांपा नगर निवासी अमिता श्रीवास अब दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest को फतह करने की तैयारी में हैं। पेशे से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अमिता का जीवन भले ही साधारण हो, लेकिन उनके सपने असाधारण हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों और सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने एवरेस्ट शिखर पर तिरंगा फहराने का लक्ष्य तय किया है।करीब 9 वर्षों की लगातार मेहनत, कठिन प्रशिक्षण और अटूट आत्मविश्वास के बाद अब वह मार्च महीने में अपने एवरेस्ट अभियान के लिए रवाना होने वाली हैं।🏔️ पहले ही लहरा चुकी हैं कई ऊंची चोटियों पर परचमएवरेस्ट अभियान से पहले अमिता कई दुर्गम चोटियों को सफलतापूर्वक फतह कर चुकी हैं।लद्दाख की UT Kangri (6,070 मीटर)लद्दाख की Kang Yatse (6,250 मीटर)इन सफल अभियानों के साथ वह छत्तीसगढ़ की तीसरी महिला पर्वतारोही बन चुकी हैं। इन उपलब्धियों ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी और अब उनका अगला लक्ष्य है—एवरेस्ट शिखर।🏠 संघर्षों के बीच तैयार हुआ शिखर तक का सपनाअमिता चांपा नगर के वार्ड नंबर 4 में अपने परिवार के साथ रहती हैं। उनके पिता बुजुर्ग हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा मजबूत नहीं रही। लेकिन हालातों को उन्होंने कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।घर की दीवारों पर सजे मेडल और प्रमाण पत्र उनके संघर्ष और सफलता की कहानी बयां करते हैं।पर्वतारोहण की शुरुआतवर्ष 2018 से पर्वतारोहण की शुरुआतमाउंट आबू से बेसिक और एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्ससिक्किम में 5,500 मीटर की ऊंचाई तक अभ्यास चढ़ाईइन प्रशिक्षणों ने उन्हें ऊंचाई पर जीवन, तकनीक और मानसिक मजबूती का अनुभव दिया।🧗 एवरेस्ट के लिए विशेष तैयारीएवरेस्ट पर ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से काफी कम, लगभग 33 प्रतिशत रह जाता है। ऐसे में अमिता ने अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता को मजबूत करने के लिए खास अभ्यास शुरू किया है।उनकी दैनिक तैयारी में शामिल है:प्रतिदिन 10 किलोमीटर दौड़वेटलिफ्टिंग और शक्ति प्रशिक्षणयोग, प्राणायाम और अनुलोम-विलोमभारी बैग के साथ ऊंचाई पर चढ़ाई का अभ्यासउनका लक्ष्य है कि ऊंचाई पर जरूरी उपकरण और सामान वह खुद वहन कर सकें।🤝 जिला प्रशासन का सहयोगअमिता के हौसले को देखते हुए जिला प्रशासन ने आर्थिक सहायता प्रदान की है। पर्वतारोहण जैसे महंगे अभियान में प्रशासनिक सहयोग उनके लिए बड़ी ताकत साबित हो रहा है।
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की चांपा नगर निवासी अमिता श्रीवास अब दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest को फतह करने की तैयारी में हैं। पेशे से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अमिता का जीवन भले ही साधारण हो, लेकिन उनके सपने असाधारण हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों और सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने एवरेस्ट शिखर पर तिरंगा फहराने का लक्ष्य तय किया है।
करीब 9 वर्षों की लगातार मेहनत, कठिन प्रशिक्षण और अटूट आत्मविश्वास के बाद अब वह मार्च महीने में अपने एवरेस्ट अभियान के लिए रवाना होने वाली हैं।
एवरेस्ट अभियान से पहले अमिता कई दुर्गम चोटियों को सफलतापूर्वक फतह कर चुकी हैं।
लद्दाख की UT Kangri (6,070 मीटर)
लद्दाख की Kang Yatse (6,250 मीटर)
इन सफल अभियानों के साथ वह छत्तीसगढ़ की तीसरी महिला पर्वतारोही बन चुकी हैं। इन उपलब्धियों ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी और अब उनका अगला लक्ष्य है—एवरेस्ट शिखर।
अमिता चांपा नगर के वार्ड नंबर 4 में अपने परिवार के साथ रहती हैं। उनके पिता बुजुर्ग हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा मजबूत नहीं रही। लेकिन हालातों को उन्होंने कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
घर की दीवारों पर सजे मेडल और प्रमाण पत्र उनके संघर्ष और सफलता की कहानी बयां करते हैं।
वर्ष 2018 से पर्वतारोहण की शुरुआत
माउंट आबू से बेसिक और एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स
सिक्किम में 5,500 मीटर की ऊंचाई तक अभ्यास चढ़ाई
इन प्रशिक्षणों ने उन्हें ऊंचाई पर जीवन, तकनीक और मानसिक मजबूती का अनुभव दिया।
एवरेस्ट पर ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से काफी कम, लगभग 33 प्रतिशत रह जाता है। ऐसे में अमिता ने अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता को मजबूत करने के लिए खास अभ्यास शुरू किया है।
प्रतिदिन 10 किलोमीटर दौड़
वेटलिफ्टिंग और शक्ति प्रशिक्षण
योग, प्राणायाम और अनुलोम-विलोम
भारी बैग के साथ ऊंचाई पर चढ़ाई का अभ्यास
उनका लक्ष्य है कि ऊंचाई पर जरूरी उपकरण और सामान वह खुद वहन कर सकें।
अमिता के हौसले को देखते हुए जिला प्रशासन ने आर्थिक सहायता प्रदान की है। पर्वतारोहण जैसे महंगे अभियान में प्रशासनिक सहयोग उनके लिए बड़ी ताकत साबित हो रहा है।
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