छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में करीब 2200 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। शहर के गांधी मैदान में दो दिवसीय धरने पर बैठकर वे सरकार से मानदेय वृद्धि, शासकीय कर्मचारी का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं देने की मांग कर रही हैं।छत्तीसगढ़ जुझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ के बैनर तले आयोजित इस धरने में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। उनका कहना है कि वे कई वर्षों से सेवा दे रही हैं, लेकिन मौजूदा मानदेय महंगाई के दौर में बेहद कम है। वर्तमान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ₹10,000 और सहायिकाओं को ₹5,000 मानदेय मिलता है, जो परिवार चलाने के लिए अपर्याप्त है।संघ की जिलाध्यक्ष रेवती वत्सल ने बताया कि विभागीय कार्यों के अलावा अन्य विभागों के अतिरिक्त काम भी सौंप दिए जाते हैं। हाल ही में SIR कार्य में भी उन्हें लगाया गया, जिससे उन्हें दिन-रात काम करना पड़ा। उनका कहना है कि इतनी जिम्मेदारियों के बावजूद उन्हें अपेक्षित वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रहीं।आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुशीला थामले ने कहा कि कई कार्यकर्ता विधवा हैं और इतने कम मानदेय में परिवार का पालन-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने शासन से मांग की है कि उन्हें शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए और बीमा, पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं प्रदान की जाएं।धरने के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो भविष्य में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में करीब 2200 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। शहर के गांधी मैदान में दो दिवसीय धरने पर बैठकर वे सरकार से मानदेय वृद्धि, शासकीय कर्मचारी का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं देने की मांग कर रही हैं।
छत्तीसगढ़ जुझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ के बैनर तले आयोजित इस धरने में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। उनका कहना है कि वे कई वर्षों से सेवा दे रही हैं, लेकिन मौजूदा मानदेय महंगाई के दौर में बेहद कम है। वर्तमान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ₹10,000 और सहायिकाओं को ₹5,000 मानदेय मिलता है, जो परिवार चलाने के लिए अपर्याप्त है।
संघ की जिलाध्यक्ष रेवती वत्सल ने बताया कि विभागीय कार्यों के अलावा अन्य विभागों के अतिरिक्त काम भी सौंप दिए जाते हैं। हाल ही में SIR कार्य में भी उन्हें लगाया गया, जिससे उन्हें दिन-रात काम करना पड़ा। उनका कहना है कि इतनी जिम्मेदारियों के बावजूद उन्हें अपेक्षित वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रहीं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुशीला थामले ने कहा कि कई कार्यकर्ता विधवा हैं और इतने कम मानदेय में परिवार का पालन-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने शासन से मांग की है कि उन्हें शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए और बीमा, पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं प्रदान की जाएं।
धरने के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो भविष्य में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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