बस्तर जिले के जगदलपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मारेंगा डोंगरीगुड़ा में इन दिनों विकास कार्यों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। NMDC Limited द्वारा संचालित डोंगरीगुड़ा रेलवे साइडिंग परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। पिछले चार दिनों से ग्रामीणों ने रेलवे साइडिंग में चल रहे काम को पूरी तरह बंद करवा दिया है, जिसके चलते लौह अयस्क की ढुलाई पूरी तरह ठप हो गई है और प्रबंधन को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2020 में ग्राम सभा से रेलवे साइडिंग के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेते समय कंपनी प्रबंधन और तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव के विकास और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का भरोसा दिलाया था। ग्रामीणों को आश्वस्त किया गया था कि परियोजना शुरू होने के बाद कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) मद से गांव में पक्की सड़कें, नालियां, सामुदायिक भवन, पेयजल सुविधा सहित कई बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन वादों पर भरोसा कर ग्रामीणों ने परियोजना के लिए सहमति दे दी थी।हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि भूमि पूजन के महज तीन दिन बाद ही जिन विकास कार्यों के आधार पर सहमति ली गई थी, उन्हें निरस्त कर दिया गया। इसके बाद लंबे समय तक रोजगार और विकास के वादे अधूरे ही रहे। विरोध के बाद करीब डेढ़ साल पश्चात कुछ स्थानीय लोगों को रोजगार मिला, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि यह संख्या बहुत सीमित है और व्यापक स्तर पर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया।गांव के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायत ने 3 करोड़ 31 लाख रुपये का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर जिला एवं जनपद पंचायत को भेजा था। जानकारी के अनुसार यह राशि शासन स्तर से स्वीकृत भी हो गई, लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक पूरी राशि ग्राम पंचायत को हस्तांतरित नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि फंड में कटौती और प्रशासनिक देरी के कारण गांव के विकास कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं।इन्हीं मांगों को लेकर ग्रामीणों ने रेलवे साइडिंग का काम बंद कर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक रोजगार, सीएसआर कार्यों और स्वीकृत विकास राशि से जुड़ी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक साइडिंग से किसी भी प्रकार का कार्य नहीं होने दिया जाएगा।गुरुवार को कंपनी के अधिकारी और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से चर्चा की, लेकिन लंबी वार्ता के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।अब निगाहें प्रशासन और कंपनी प्रबंधन पर टिकी हैं कि वे ग्रामीणों की मांगों पर किस तरह निर्णय लेते हैं और इस गतिरोध को कैसे समाप्त करते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि उनका विरोध विकास के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे केवल उन वादों को पूरा करवाना चाहते हैं जो उन्हें परियोजना की स्वीकृति के समय किए गए थे।
बस्तर जिले के जगदलपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मारेंगा डोंगरीगुड़ा में इन दिनों विकास कार्यों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। NMDC Limited द्वारा संचालित डोंगरीगुड़ा रेलवे साइडिंग परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। पिछले चार दिनों से ग्रामीणों ने रेलवे साइडिंग में चल रहे काम को पूरी तरह बंद करवा दिया है, जिसके चलते लौह अयस्क की ढुलाई पूरी तरह ठप हो गई है और प्रबंधन को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2020 में ग्राम सभा से रेलवे साइडिंग के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेते समय कंपनी प्रबंधन और तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव के विकास और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का भरोसा दिलाया था। ग्रामीणों को आश्वस्त किया गया था कि परियोजना शुरू होने के बाद कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) मद से गांव में पक्की सड़कें, नालियां, सामुदायिक भवन, पेयजल सुविधा सहित कई बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन वादों पर भरोसा कर ग्रामीणों ने परियोजना के लिए सहमति दे दी थी।
हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि भूमि पूजन के महज तीन दिन बाद ही जिन विकास कार्यों के आधार पर सहमति ली गई थी, उन्हें निरस्त कर दिया गया। इसके बाद लंबे समय तक रोजगार और विकास के वादे अधूरे ही रहे। विरोध के बाद करीब डेढ़ साल पश्चात कुछ स्थानीय लोगों को रोजगार मिला, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि यह संख्या बहुत सीमित है और व्यापक स्तर पर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया।
गांव के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायत ने 3 करोड़ 31 लाख रुपये का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर जिला एवं जनपद पंचायत को भेजा था। जानकारी के अनुसार यह राशि शासन स्तर से स्वीकृत भी हो गई, लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक पूरी राशि ग्राम पंचायत को हस्तांतरित नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि फंड में कटौती और प्रशासनिक देरी के कारण गांव के विकास कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं।
इन्हीं मांगों को लेकर ग्रामीणों ने रेलवे साइडिंग का काम बंद कर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक रोजगार, सीएसआर कार्यों और स्वीकृत विकास राशि से जुड़ी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक साइडिंग से किसी भी प्रकार का कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
गुरुवार को कंपनी के अधिकारी और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से चर्चा की, लेकिन लंबी वार्ता के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।
अब निगाहें प्रशासन और कंपनी प्रबंधन पर टिकी हैं कि वे ग्रामीणों की मांगों पर किस तरह निर्णय लेते हैं और इस गतिरोध को कैसे समाप्त करते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि उनका विरोध विकास के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे केवल उन वादों को पूरा करवाना चाहते हैं जो उन्हें परियोजना की स्वीकृति के समय किए गए थे।
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