जिले में वर्ष 2020 में लापता हुए मासूम टिल्लू उर्फ प्रिंस हत्याकांड में छह साल बाद बड़ा खुलासा होने से सनसनी फैल गई है। चार वर्षीय बच्चे के रहस्यमय ढंग से गायब होने के मामले में अब हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने शव की तलाश के लिए अभियान तेज कर दिया है।जांच एजेंसियां दिल्ली‑मुंबई एक्सप्रेसवे के किनारे चिन्हित संदिग्ध स्थानों पर खुदाई करा रही हैं। आरोपियों ने पूछताछ में कथित रूप से स्वीकार किया है कि हत्या के बाद शव को एक्सप्रेसवे क्षेत्र में दफना दिया गया था।👮 विशेष टीम कर रही जांचजिले के एसपी सागर राणा के अनुसार मामला करीब छह वर्ष पुराना है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेंद्र फौजदार की निगरानी में विशेष टीम गठित की गई है। पुलिस का दावा है कि भाई-बहन आरोपियों ने आपसी रंजिश के चलते बच्चे का अपहरण कर हत्या की और शव को एक्सप्रेसवे क्षेत्र में दफना दिया।थाना अधिकारी ज़हीर अब्बास मेव ने बताया कि पहले भी आरोपियों द्वारा बताए गए स्थानों पर खुदाई की गई थी। अब ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) जैसी आधुनिक तकनीक की मदद से सटीक लोकेशन चिन्हित कर आगे की खुदाई की जा रही है। इस अभियान में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से अनुमति लेकर जेसीबी और अन्य मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।👨👦 दुबई से लौटे पिता, न्याय की उम्मीदमासूम के पिता जगमोहन बिरला, जो दुबई में कार्यरत हैं, खुदाई की सूचना मिलते ही भारत लौट आए। उन्होंने बताया कि पिछले छह वर्षों में बेटे की तलाश और न्याय की उम्मीद में लगभग 10 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। कई अधिकारियों और अदालतों के चक्कर लगाने के बाद अब उन्हें उम्मीद है कि इस बार सच सामने आएगा और दोषियों को सजा मिलेगी।⛏️ पांच स्थानों पर खुदाई, अभी तक नहीं मिला शवपुलिस ने बच्चे के दो रिश्तेदारों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में दोनों ने कथित रूप से हत्या कर शव को दबाने की बात स्वीकार की। इसके बाद 24 और 25 फरवरी को पांच चिन्हित स्थानों पर कई घंटों तक खुदाई अभियान चलाया गया, लेकिन अभी तक कोई अवशेष बरामद नहीं हो सके हैं।🌍 बदली भौगोलिक स्थिति बनी चुनौतीपुलिस अधिकारियों का कहना है कि छह वर्षों में इलाके की भौगोलिक संरचना काफी बदल चुकी है। एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान मिट्टी भराव और कटान से जमीन का स्तर बदल गया है, जिससे सटीक स्थान की पहचान करना कठिन हो गया है। जरूरत पड़ने पर सड़क के कुछ हिस्सों को तोड़ने की भी तैयारी है।📅 16 अगस्त 2020 को लापता हुआ था बच्चाबच्चा 16 अगस्त 2020 को घर के आंगन से अचानक गायब हो गया था। परिवार ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। 2021 में परिजनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दोबारा जांच की मांग की, जिसके बाद मामला फिर खुला और संदिग्धों से सख्ती से पूछताछ की गई।खुदाई स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ग्रामीण और परिजन मौके पर मौजूद रहकर हर गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं। छह साल पुराने इस मामले में अब तक शव का न मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है, लेकिन पुलिस का कहना है कि सच सामने लाने के लिए सभी संभावित स्थानों की जांच जारी रहेगी।
जिले में वर्ष 2020 में लापता हुए मासूम टिल्लू उर्फ प्रिंस हत्याकांड में छह साल बाद बड़ा खुलासा होने से सनसनी फैल गई है। चार वर्षीय बच्चे के रहस्यमय ढंग से गायब होने के मामले में अब हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने शव की तलाश के लिए अभियान तेज कर दिया है।
जांच एजेंसियां दिल्ली‑मुंबई एक्सप्रेसवे के किनारे चिन्हित संदिग्ध स्थानों पर खुदाई करा रही हैं। आरोपियों ने पूछताछ में कथित रूप से स्वीकार किया है कि हत्या के बाद शव को एक्सप्रेसवे क्षेत्र में दफना दिया गया था।
जिले के एसपी सागर राणा के अनुसार मामला करीब छह वर्ष पुराना है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेंद्र फौजदार की निगरानी में विशेष टीम गठित की गई है। पुलिस का दावा है कि भाई-बहन आरोपियों ने आपसी रंजिश के चलते बच्चे का अपहरण कर हत्या की और शव को एक्सप्रेसवे क्षेत्र में दफना दिया।
थाना अधिकारी ज़हीर अब्बास मेव ने बताया कि पहले भी आरोपियों द्वारा बताए गए स्थानों पर खुदाई की गई थी। अब ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) जैसी आधुनिक तकनीक की मदद से सटीक लोकेशन चिन्हित कर आगे की खुदाई की जा रही है। इस अभियान में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से अनुमति लेकर जेसीबी और अन्य मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।
मासूम के पिता जगमोहन बिरला, जो दुबई में कार्यरत हैं, खुदाई की सूचना मिलते ही भारत लौट आए। उन्होंने बताया कि पिछले छह वर्षों में बेटे की तलाश और न्याय की उम्मीद में लगभग 10 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। कई अधिकारियों और अदालतों के चक्कर लगाने के बाद अब उन्हें उम्मीद है कि इस बार सच सामने आएगा और दोषियों को सजा मिलेगी।
पुलिस ने बच्चे के दो रिश्तेदारों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में दोनों ने कथित रूप से हत्या कर शव को दबाने की बात स्वीकार की। इसके बाद 24 और 25 फरवरी को पांच चिन्हित स्थानों पर कई घंटों तक खुदाई अभियान चलाया गया, लेकिन अभी तक कोई अवशेष बरामद नहीं हो सके हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि छह वर्षों में इलाके की भौगोलिक संरचना काफी बदल चुकी है। एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान मिट्टी भराव और कटान से जमीन का स्तर बदल गया है, जिससे सटीक स्थान की पहचान करना कठिन हो गया है। जरूरत पड़ने पर सड़क के कुछ हिस्सों को तोड़ने की भी तैयारी है।
बच्चा 16 अगस्त 2020 को घर के आंगन से अचानक गायब हो गया था। परिवार ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। 2021 में परिजनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दोबारा जांच की मांग की, जिसके बाद मामला फिर खुला और संदिग्धों से सख्ती से पूछताछ की गई।
खुदाई स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ग्रामीण और परिजन मौके पर मौजूद रहकर हर गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं। छह साल पुराने इस मामले में अब तक शव का न मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है, लेकिन पुलिस का कहना है कि सच सामने लाने के लिए सभी संभावित स्थानों की जांच जारी रहेगी।
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