छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंबिकापुर शहर में एक निजी अस्पताल के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के दौरान एक पत्रकार पर हमला कर दिया गया। यह घटना उस समय हुई जब पत्रकार सुशील कुमार बखला प्रदर्शन की कवरेज कर रहे थे। भीड़ में मौजूद कुछ युवकों ने अचानक उन पर हमला कर दिया। बीच-बचाव करने पहुंचे अन्य पत्रकारों को भी चोटें आईं।हैरानी की बात यह रही कि घटना के समय मौके पर भारी पुलिस बल तैनात था और कोतवाली थाना प्रभारी भी मौजूद थे, बावजूद इसके भीड़ में शामिल लोगों ने पत्रकार के साथ मारपीट कर दी।📍 किस मामले की कर रहे थे कवरेज?शहर के लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल के बाहर लगे ट्रांसफार्मर को हटाने की मांग को लेकर स्थानीय लोग प्रदर्शन कर रहे थे। रिहायशी क्षेत्र में ट्रांसफार्मर लगाए जाने का विरोध किया जा रहा था। सुबह से शुरू हुआ विरोध शाम तक उग्र हो गया और दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई।सूचना मिलते ही एसडीएम, एएसपी, सीएसपी सहित पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया, लेकिन अस्पताल और प्रदर्शनकारियों के बीच हो रही झड़प के दौरान कवरेज कर रहे पत्रकार पर हमला हो गया।🚨 कोतवाली थाने का घेराव और नारेबाजीपत्रकार की पिटाई के बाद सरगुजा प्रेस क्लब और जिले भर के पत्रकारों ने कोतवाली थाने का घेराव कर दिया। पुलिस प्रशासन और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पत्रकार धरने पर बैठ गए। हालांकि प्रदर्शन आधिकारिक रूप से भाजपा द्वारा आयोजित नहीं था, लेकिन भीड़ में बड़ी संख्या में भाजपा समर्थकों की मौजूदगी और एक बड़े नेता की भूमिका को लेकर पत्रकारों में आक्रोश देखा गया।पत्रकारों के समर्थन में कांग्रेस नेता आदितेश्वर शरण सिंहदेव, कांग्रेस जिलाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी भी थाने पहुंचे और घटना की निंदा की। शहर के व्यापारी, समाजसेवी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग भी समर्थन में जुटे।⚖️ पुलिस कार्रवाईएडिशनल एसपी और सीएसपी ने मौके पर पहुंचकर मारपीट का वीडियो देखा और पत्रकारों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने बीएनएस की धारा 296, 351(2), 115(2), 3(5) तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3-1 (R-S) और 3(2)(V) के तहत अरुणेंद्र प्रताप सिंह, आकाश सिंह और बडू सिंह के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।कांग्रेस नेता आदितेश्वर शरण सिंहदेव ने इस घटना को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।📢 गिरफ्तारी की मांग जारीएफआईआर दर्ज होने के बाद पत्रकारों ने धरना समाप्त कर दिया, लेकिन आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और घटना के दौरान निष्क्रिय रहे पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग जारी है।यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंबिकापुर शहर में एक निजी अस्पताल के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के दौरान एक पत्रकार पर हमला कर दिया गया। यह घटना उस समय हुई जब पत्रकार सुशील कुमार बखला प्रदर्शन की कवरेज कर रहे थे। भीड़ में मौजूद कुछ युवकों ने अचानक उन पर हमला कर दिया। बीच-बचाव करने पहुंचे अन्य पत्रकारों को भी चोटें आईं।
हैरानी की बात यह रही कि घटना के समय मौके पर भारी पुलिस बल तैनात था और कोतवाली थाना प्रभारी भी मौजूद थे, बावजूद इसके भीड़ में शामिल लोगों ने पत्रकार के साथ मारपीट कर दी।
शहर के लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल के बाहर लगे ट्रांसफार्मर को हटाने की मांग को लेकर स्थानीय लोग प्रदर्शन कर रहे थे। रिहायशी क्षेत्र में ट्रांसफार्मर लगाए जाने का विरोध किया जा रहा था। सुबह से शुरू हुआ विरोध शाम तक उग्र हो गया और दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई।
सूचना मिलते ही एसडीएम, एएसपी, सीएसपी सहित पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया, लेकिन अस्पताल और प्रदर्शनकारियों के बीच हो रही झड़प के दौरान कवरेज कर रहे पत्रकार पर हमला हो गया।
पत्रकार की पिटाई के बाद सरगुजा प्रेस क्लब और जिले भर के पत्रकारों ने कोतवाली थाने का घेराव कर दिया। पुलिस प्रशासन और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पत्रकार धरने पर बैठ गए। हालांकि प्रदर्शन आधिकारिक रूप से भाजपा द्वारा आयोजित नहीं था, लेकिन भीड़ में बड़ी संख्या में भाजपा समर्थकों की मौजूदगी और एक बड़े नेता की भूमिका को लेकर पत्रकारों में आक्रोश देखा गया।
पत्रकारों के समर्थन में कांग्रेस नेता आदितेश्वर शरण सिंहदेव, कांग्रेस जिलाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी भी थाने पहुंचे और घटना की निंदा की। शहर के व्यापारी, समाजसेवी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग भी समर्थन में जुटे।
एडिशनल एसपी और सीएसपी ने मौके पर पहुंचकर मारपीट का वीडियो देखा और पत्रकारों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने बीएनएस की धारा 296, 351(2), 115(2), 3(5) तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3-1 (R-S) और 3(2)(V) के तहत अरुणेंद्र प्रताप सिंह, आकाश सिंह और बडू सिंह के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।
कांग्रेस नेता आदितेश्वर शरण सिंहदेव ने इस घटना को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
एफआईआर दर्ज होने के बाद पत्रकारों ने धरना समाप्त कर दिया, लेकिन आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और घटना के दौरान निष्क्रिय रहे पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग जारी है।
यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।
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