तमिलनाडु की सियासत में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कणगम (AIADMK) से निष्कासित नेता ओ. पन्नीरसेल्वम ने शुक्रवार को आधिकारिक रूप से द्रविड़ मुनेत्र कणगम (DMK) का दामन थाम लिया। वे मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए।यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब पन्नीरसेल्वम खेमे की ओर से हाल ही में एम. के. स्टालिन की तारीफ और डीएमके सरकार की वापसी की भविष्यवाणी की गई थी। इससे पहले उनके समर्थक विधायक पी. अय्यप्पन ने विधानसभा में बयान देते हुए कहा था कि “पुरैची थलाइवर एमजी के आशीर्वाद से एम. के. स्टालिन को फिर से तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनना चाहिए।”पन्नीरसेल्वम तीन बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वे दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के करीबी माने जाते थे। वर्ष 2001 में पहली बार उन्होंने छह महीने के लिए मुख्यमंत्री पद संभाला। इसके बाद 2014 में एक महीने और 2016-17 के दौरान तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। हालांकि, पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर एडप्पादी के. पलानीस्वामी के साथ लंबे संघर्ष के बाद उन्हें AIADMK से निष्कासित कर दिया गया था।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पन्नीरसेल्वम के डीएमके में शामिल होने से दक्षिण तमिलनाडु की राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है। विशेषकर थेवर समुदाय में उनका प्रभाव माना जाता है, जो कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है।234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा के चुनाव 2026 के पहले छह महीनों में होने हैं। एम. के. स्टालिन के नेतृत्व वाला गठबंधन ‘द्रविड़ मॉडल 2.0’ के एजेंडे के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर BJP-AIADMK गठबंधन मुकाबले में होगा, जबकि अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के मैदान में उतरने से त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना जताई जा रही है।📊 पिछला चुनावी गणित (2021)2021 के विधानसभा चुनाव में DMK ने 133 सीटें जीती थीं। कांग्रेस ने 18, PMK ने 5, VCK ने 4 और अन्य ने 8 सीटें हासिल की थीं। DMK के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) ने कुल 159 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। वहीं NDA गठबंधन को 75 सीटें मिली थीं, जिसमें AIADMK 66 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी।पन्नीरसेल्वम का यह कदम 2026 के चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव ला सकता है और तमिलनाडु की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
तमिलनाडु की सियासत में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कणगम (AIADMK) से निष्कासित नेता ओ. पन्नीरसेल्वम ने शुक्रवार को आधिकारिक रूप से द्रविड़ मुनेत्र कणगम (DMK) का दामन थाम लिया। वे मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए।
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब पन्नीरसेल्वम खेमे की ओर से हाल ही में एम. के. स्टालिन की तारीफ और डीएमके सरकार की वापसी की भविष्यवाणी की गई थी। इससे पहले उनके समर्थक विधायक पी. अय्यप्पन ने विधानसभा में बयान देते हुए कहा था कि “पुरैची थलाइवर एमजी के आशीर्वाद से एम. के. स्टालिन को फिर से तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनना चाहिए।”
पन्नीरसेल्वम तीन बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वे दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के करीबी माने जाते थे। वर्ष 2001 में पहली बार उन्होंने छह महीने के लिए मुख्यमंत्री पद संभाला। इसके बाद 2014 में एक महीने और 2016-17 के दौरान तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। हालांकि, पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर एडप्पादी के. पलानीस्वामी के साथ लंबे संघर्ष के बाद उन्हें AIADMK से निष्कासित कर दिया गया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पन्नीरसेल्वम के डीएमके में शामिल होने से दक्षिण तमिलनाडु की राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है। विशेषकर थेवर समुदाय में उनका प्रभाव माना जाता है, जो कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है।
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा के चुनाव 2026 के पहले छह महीनों में होने हैं। एम. के. स्टालिन के नेतृत्व वाला गठबंधन ‘द्रविड़ मॉडल 2.0’ के एजेंडे के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर BJP-AIADMK गठबंधन मुकाबले में होगा, जबकि अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के मैदान में उतरने से त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना जताई जा रही है।
2021 के विधानसभा चुनाव में DMK ने 133 सीटें जीती थीं। कांग्रेस ने 18, PMK ने 5, VCK ने 4 और अन्य ने 8 सीटें हासिल की थीं। DMK के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) ने कुल 159 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। वहीं NDA गठबंधन को 75 सीटें मिली थीं, जिसमें AIADMK 66 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी।
पन्नीरसेल्वम का यह कदम 2026 के चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव ला सकता है और तमिलनाडु की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
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