नई दिल्ली:भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई अहम बातचीत के बाद अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले को दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।इस भारत–अमेरिका ट्रेड डील का देश के दिग्गज नेताओं ने खुलकर स्वागत किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बधाई दी है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह समझौता भारत–अमेरिका संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि टैरिफ घटने से व्यापारिक संबंधों में तेजी आएगी और दोनों देशों को ठोस लाभ मिलेगा।गृह मंत्री अमित शाह ने इसे भारत–अमेरिका संबंधों के लिए बड़ा दिन बताते हुए कहा कि इस ट्रेड डील से व्यापारिक रिश्ते और मजबूत होंगे तथा आपसी विकास को नई दिशा मिलेगी।वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता किसानों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, उद्यमियों और कुशल श्रमिकों के लिए अभूतपूर्व अवसर लेकर आएगा। उन्होंने इसे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम बताया।संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि भारत और अमेरिका साझा मूल्यों वाले स्वाभाविक साझेदार हैं और यह व्यापार साझेदारी आपसी विश्वास, अवसरों और वैश्विक जिम्मेदारियों को दर्शाती है।कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस डील को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे भारतीय किसानों, युवाओं और उद्योगों को बड़ा लाभ होगा और दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग और मजबूत होगा।इस बीच व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि अमेरिका रूसी तेल खरीद के मुद्दे पर भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को भी हटाने पर सहमत हो गया है, बशर्ते भारत रूसी तेल की खरीद को पूरी तरह समाप्त करे।कुल मिलाकर, भारत–अमेरिका ट्रेड डील को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला ऐतिहासिक समझौता माना जा रहा है।
नई दिल्ली:भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई अहम बातचीत के बाद अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले को दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इस भारत–अमेरिका ट्रेड डील का देश के दिग्गज नेताओं ने खुलकर स्वागत किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बधाई दी है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह समझौता भारत–अमेरिका संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि टैरिफ घटने से व्यापारिक संबंधों में तेजी आएगी और दोनों देशों को ठोस लाभ मिलेगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने इसे भारत–अमेरिका संबंधों के लिए बड़ा दिन बताते हुए कहा कि इस ट्रेड डील से व्यापारिक रिश्ते और मजबूत होंगे तथा आपसी विकास को नई दिशा मिलेगी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता किसानों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, उद्यमियों और कुशल श्रमिकों के लिए अभूतपूर्व अवसर लेकर आएगा। उन्होंने इसे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम बताया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि भारत और अमेरिका साझा मूल्यों वाले स्वाभाविक साझेदार हैं और यह व्यापार साझेदारी आपसी विश्वास, अवसरों और वैश्विक जिम्मेदारियों को दर्शाती है।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस डील को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे भारतीय किसानों, युवाओं और उद्योगों को बड़ा लाभ होगा और दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग और मजबूत होगा।
इस बीच व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि अमेरिका रूसी तेल खरीद के मुद्दे पर भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को भी हटाने पर सहमत हो गया है, बशर्ते भारत रूसी तेल की खरीद को पूरी तरह समाप्त करे।
कुल मिलाकर, भारत–अमेरिका ट्रेड डील को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला ऐतिहासिक समझौता माना जा रहा है।
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