नई दिल्ली/नोएडा।नोएडा सेक्टर-150 के बहुचर्चित सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता मौत मामले में गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी जांच लगभग पूरी कर ली है। मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर की अध्यक्षता वाली एसआईटी आज रविवार को अपनी 450 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि रेस्क्यू ऑपरेशन में हुई चूक के लिए किस विभाग और किस अधिकारी की जिम्मेदारी तय होती है।शनिवार को नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-6 स्थित कार्यालय में पूरे दिन जांच को लेकर हलचल बनी रही। एसआईटी टीम ने फाइलों और दस्तावेजों के आधार पर उन अधिकारियों की भूमिका की गहन समीक्षा की, जिनकी लापरवाही के कारण एक होनहार सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान चली गई। जांच का सबसे अहम बिंदु वह करीब दो घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन है, जिसके दौरान युवराज को बचाया जा सकता था, लेकिन संसाधनों की कमी और देरी घातक साबित हुई।एसआईटी ने पुलिस से यह भी सवाल किया कि मामले में दोषियों की गिरफ्तारी में अब तक देरी क्यों हो रही है। इसके साथ ही घटना के चश्मदीद मुनेंद्र और उसके परिजनों को बयान दर्ज कराने के लिए नोएडा बुलाया गया। मुनेंद्र शनिवार दोपहर करीब दो बजे एसआईटी के समक्ष पेश हुआ। जांच टीम को उम्मीद है कि उसकी गवाही से हादसे के समय की परिस्थितियों और पूरे घटनाक्रम पर महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।गौरतलब है कि युवराज मेहता की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया था, जिसे पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच सौंपी गई थी।🔎 क्या है पूरा मामलायह दर्दनाक हादसा 16-17 जनवरी 2026 की दरमियानी रात को हुआ था। 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम से अपने घर नोएडा सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क लौट रहे थे। घने कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम थी। इसी दौरान उनकी कार एक निर्माणाधीन मॉल के लिए खोदे गए करीब 30 फीट गहरे गड्ढे में गिर गई, जो बारिश और ड्रेनेज के पानी से भरा हुआ था।युवराज करीब दो घंटे तक अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करते रहे। उन्होंने कार की छत पर चढ़कर अपने पिता को फोन कर मदद मांगी, लेकिन मौके पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम, चेतावनी संकेत और रेस्क्यू उपकरण न होने के कारण उन्हें समय पर नहीं बचाया जा सका। अंततः उनकी मौत हो गई, जिसने प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।अब एसआईटी की रिपोर्ट के बाद इस बात पर से पर्दा उठेगा कि इस हादसे में किसकी चूक ने युवराज मेहता की जान ली और किन अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
नई दिल्ली/नोएडा।नोएडा सेक्टर-150 के बहुचर्चित सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता मौत मामले में गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी जांच लगभग पूरी कर ली है। मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर की अध्यक्षता वाली एसआईटी आज रविवार को अपनी 450 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि रेस्क्यू ऑपरेशन में हुई चूक के लिए किस विभाग और किस अधिकारी की जिम्मेदारी तय होती है।
शनिवार को नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-6 स्थित कार्यालय में पूरे दिन जांच को लेकर हलचल बनी रही। एसआईटी टीम ने फाइलों और दस्तावेजों के आधार पर उन अधिकारियों की भूमिका की गहन समीक्षा की, जिनकी लापरवाही के कारण एक होनहार सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान चली गई। जांच का सबसे अहम बिंदु वह करीब दो घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन है, जिसके दौरान युवराज को बचाया जा सकता था, लेकिन संसाधनों की कमी और देरी घातक साबित हुई।
एसआईटी ने पुलिस से यह भी सवाल किया कि मामले में दोषियों की गिरफ्तारी में अब तक देरी क्यों हो रही है। इसके साथ ही घटना के चश्मदीद मुनेंद्र और उसके परिजनों को बयान दर्ज कराने के लिए नोएडा बुलाया गया। मुनेंद्र शनिवार दोपहर करीब दो बजे एसआईटी के समक्ष पेश हुआ। जांच टीम को उम्मीद है कि उसकी गवाही से हादसे के समय की परिस्थितियों और पूरे घटनाक्रम पर महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।
गौरतलब है कि युवराज मेहता की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया था, जिसे पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच सौंपी गई थी।
यह दर्दनाक हादसा 16-17 जनवरी 2026 की दरमियानी रात को हुआ था। 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम से अपने घर नोएडा सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क लौट रहे थे। घने कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम थी। इसी दौरान उनकी कार एक निर्माणाधीन मॉल के लिए खोदे गए करीब 30 फीट गहरे गड्ढे में गिर गई, जो बारिश और ड्रेनेज के पानी से भरा हुआ था।
युवराज करीब दो घंटे तक अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करते रहे। उन्होंने कार की छत पर चढ़कर अपने पिता को फोन कर मदद मांगी, लेकिन मौके पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम, चेतावनी संकेत और रेस्क्यू उपकरण न होने के कारण उन्हें समय पर नहीं बचाया जा सका। अंततः उनकी मौत हो गई, जिसने प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
अब एसआईटी की रिपोर्ट के बाद इस बात पर से पर्दा उठेगा कि इस हादसे में किसकी चूक ने युवराज मेहता की जान ली और किन अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
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