बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुर्ग जिले के जनपद पंचायत पाटन में पदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जागेंद्र कुमार के स्थानांतरण आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव और जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।जस्टिस पीपी साहू की बेंच में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और नरेंद्र मेहेर ने दलील दी कि जागेंद्र कुमार का मूल पद जनपद पंचायत के CEO का है, लेकिन उन्हें प्रभारी सहायक परियोजना अधिकारी, जिला पंचायत राजनांदगांव के पद पर स्थानांतरित किया गया है, जो प्रतिनियुक्ति का पद है। इसके लिए न तो उनकी सहमति ली गई और न ही नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई गई, जो कि विधि विरुद्ध है।स्थानांतरण नीति के उल्लंघन का आरोपयाचिका में बताया गया कि जागेंद्र कुमार ने 27 नवंबर 2024 को जनपद पंचायत पाटन में कार्यभार ग्रहण किया था। इस तरह एक वर्ष से भी कम समय में उनका स्थानांतरण किया गया, जो कि स्थानांतरण नीति 2025 की कंडिका 3.9 का उल्लंघन है। नीति के अनुसार 1 जून 2025 की स्थिति में एक वर्ष से कम अवधि में पदस्थ अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं किया जा सकता।निर्वाचन कार्य में संलग्न होने का भी दिया हवालाअधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता वर्तमान में सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के तहत विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में लगे हुए हैं। ऐसे में निर्वाचन नामावली कार्य से जुड़े अधिकारियों के स्थानांतरण पर राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है।कोर्ट का आदेशसभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जागेंद्र कुमार के स्थानांतरण आदेश पर तत्काल रोक लगा दी और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
जस्टिस पीपी साहू की बेंच में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और नरेंद्र मेहेर ने दलील दी कि जागेंद्र कुमार का मूल पद जनपद पंचायत के CEO का है, लेकिन उन्हें प्रभारी सहायक परियोजना अधिकारी, जिला पंचायत राजनांदगांव के पद पर स्थानांतरित किया गया है, जो प्रतिनियुक्ति का पद है। इसके लिए न तो उनकी सहमति ली गई और न ही नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई गई, जो कि विधि विरुद्ध है।
स्थानांतरण नीति के उल्लंघन का आरोप
याचिका में बताया गया कि जागेंद्र कुमार ने 27 नवंबर 2024 को जनपद पंचायत पाटन में कार्यभार ग्रहण किया था। इस तरह एक वर्ष से भी कम समय में उनका स्थानांतरण किया गया, जो कि स्थानांतरण नीति 2025 की कंडिका 3.9 का उल्लंघन है। नीति के अनुसार 1 जून 2025 की स्थिति में एक वर्ष से कम अवधि में पदस्थ अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं किया जा सकता।
निर्वाचन कार्य में संलग्न होने का भी दिया हवाला
अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता वर्तमान में सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के तहत विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में लगे हुए हैं। ऐसे में निर्वाचन नामावली कार्य से जुड़े अधिकारियों के स्थानांतरण पर राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है।
कोर्ट का आदेश
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जागेंद्र कुमार के स्थानांतरण आदेश पर तत्काल रोक लगा दी और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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