दुर्ग, धमतरी और राजनांदगांव में सघन चेकिंग, बम व डॉग स्क्वॉड तैनात छत्तीसगढ़ के जिला न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पूरे प्रदेश में कोर्ट परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। 8 जनवरी को ईमेल के माध्यम से दी गई इस धमकी के बाद दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर सहित कई जिलों के न्यायालयों में पुलिस, सीआरपीएफ, बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड की तैनाती की गई है।न्यायालय परिसरों में आने-जाने वाले पक्षकारों, अधिवक्ताओं और वाहनों की सघन जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां हर संदिग्ध स्थान पर बारीकी से तलाशी ले रही हैं।दुर्ग जिला न्यायालय में कड़ी सुरक्षादुर्ग जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद कोर्ट परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। कोर्ट के हर प्रवेश द्वार पर पुलिस और सीआरपीएफ के जवान तैनात हैं। बिना जांच किसी को भी परिसर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।जानकारी के अनुसार यह धमकी तमिलनाडु से ईमेल के जरिए भेजी गई थी।अधिवक्ता संघ का बयानजिला अधिवक्ता संघ के सचिव रविशंकर सिंह ने बताया कि तमिलनाडु के एक संगठन द्वारा ईमेल के माध्यम से दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर के न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है।उन्होंने कहा कि ईमेल भेजने वाला व्यक्ति किसी मामले में सजा से आहत बताया जा रहा है, इसी कारण उसने न्यायालयों को निशाना बनाने की धमकी दी है।सूचना मिलते ही पुलिस का एक्शनधमकी की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कोर्ट परिसरों में सुरक्षा बढ़ाई गई और गहन तलाशी अभियान चलाया गया।अब तक किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि यह मेल केवल भय फैलाने के उद्देश्य से भेजा गया था।8 जनवरी को उड़ाने की थी धमकीअधिवक्ता रविशंकर सिंह के अनुसार ईमेल में 8 जनवरी को ही कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की बात लिखी गई थी। इसकी जानकारी सुबह करीब 10 बजे मिली, जिसके बाद पूरे दिन सुरक्षा जांच अभियान चलाया गया।राजनांदगांव और धमतरी में भी अलर्टधमकी का असर प्रदेश के अन्य जिलों में भी देखने को मिला।राजनांदगांव और धमतरी जिला न्यायालयों में भी पुलिस बल, डॉग स्क्वॉड और बम स्क्वॉड तैनात किए गए हैं। धमतरी न्यायालय में वाहनों और पक्षकारों की कड़ाई से जांच की जा रही है, जबकि बम स्क्वॉड द्वारा संदिग्ध स्थानों की गहन तलाशी ली जा रही है।आम लोगों को हो रही परेशानीसख्त जांच के चलते न्यायालय पहुंचे पक्षकारों को कुछ असुविधा जरूर हो रही है, हालांकि सुरक्षा को देखते हुए सभी आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं। अधिवक्ता संघ का कहना है कि ऐसी सुरक्षा जांच समय-समय पर होनी चाहिए, ताकि न्यायालय परिसर में पारदर्शिता और सुरक्षा बनी रहे।
न्यायालय परिसरों में आने-जाने वाले पक्षकारों, अधिवक्ताओं और वाहनों की सघन जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां हर संदिग्ध स्थान पर बारीकी से तलाशी ले रही हैं।
दुर्ग जिला न्यायालय में कड़ी सुरक्षा
दुर्ग जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद कोर्ट परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। कोर्ट के हर प्रवेश द्वार पर पुलिस और सीआरपीएफ के जवान तैनात हैं। बिना जांच किसी को भी परिसर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार यह धमकी तमिलनाडु से ईमेल के जरिए भेजी गई थी।
अधिवक्ता संघ का बयान
जिला अधिवक्ता संघ के सचिव रविशंकर सिंह ने बताया कि तमिलनाडु के एक संगठन द्वारा ईमेल के माध्यम से दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर के न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है।
उन्होंने कहा कि ईमेल भेजने वाला व्यक्ति किसी मामले में सजा से आहत बताया जा रहा है, इसी कारण उसने न्यायालयों को निशाना बनाने की धमकी दी है।
सूचना मिलते ही पुलिस का एक्शन
धमकी की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कोर्ट परिसरों में सुरक्षा बढ़ाई गई और गहन तलाशी अभियान चलाया गया।
अब तक किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि यह मेल केवल भय फैलाने के उद्देश्य से भेजा गया था।
8 जनवरी को उड़ाने की थी धमकी
अधिवक्ता रविशंकर सिंह के अनुसार ईमेल में 8 जनवरी को ही कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की बात लिखी गई थी। इसकी जानकारी सुबह करीब 10 बजे मिली, जिसके बाद पूरे दिन सुरक्षा जांच अभियान चलाया गया।
राजनांदगांव और धमतरी में भी अलर्ट
धमकी का असर प्रदेश के अन्य जिलों में भी देखने को मिला।
राजनांदगांव और धमतरी जिला न्यायालयों में भी पुलिस बल, डॉग स्क्वॉड और बम स्क्वॉड तैनात किए गए हैं। धमतरी न्यायालय में वाहनों और पक्षकारों की कड़ाई से जांच की जा रही है, जबकि बम स्क्वॉड द्वारा संदिग्ध स्थानों की गहन तलाशी ली जा रही है।
आम लोगों को हो रही परेशानी
सख्त जांच के चलते न्यायालय पहुंचे पक्षकारों को कुछ असुविधा जरूर हो रही है, हालांकि सुरक्षा को देखते हुए सभी आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं। अधिवक्ता संघ का कहना है कि ऐसी सुरक्षा जांच समय-समय पर होनी चाहिए, ताकि न्यायालय परिसर में पारदर्शिता और सुरक्षा बनी रहे।
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