दुर्ग जिले में सोमवार को जमीन की गाइडलाइन दरों में भारी बढ़ोतरी के खिलाफ रियल एस्टेट कारोबारियों और जमीन व्यापारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। बढ़ी हुई दरों से नाराज सैकड़ों की संख्या में कारोबारी काले गुब्बारे और काले झंडे लेकर कलेक्ट्रेट घेराव के लिए पैदल मार्च निकालने रवाना हुए। व्यापारियों का आरोप है कि नई गाइडलाइन से जमीन और मकानों की रजिस्ट्री कई गुना महंगी हो गई है, जिससे कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई।हालात नियंत्रण से बाहर होते देख पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया।प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए पुलिस पहले से ही सतर्क थी और कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने वाले मार्गों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जैसे ही प्रदर्शनकारी पटेल चौक पहुंचे, पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। कई बार समझाइश देने के बावजूद भीड़ कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने पर अड़ी रही। स्थिति तब बिगड़ गई जब अचानक भीड़ में से कुछ तत्वों ने पुलिस पर पानी के पाउच फेंक दिए, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई।हालात नियंत्रण से बाहर होते देख पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। इसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हुए, जिन्हें तुरंत अस्पताल भेजा गया। घटना के तुरंत बाद इलाके में तनाव फैल गया, जिस पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने 7 से 8 लोगों को गिरफ्तार किया है, और अधिकारियों का कहना है कि संख्या आगे बढ़ सकती है।प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रियल एस्टेट कारोबारी पंकज मारकंडे ने बताया कि वे पिछले सात दिनों से शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे और प्रशासन को चक्का जाम की पूर्व सूचना भी दी गई थी। उनका कहना है कि पीछे से कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा पुलिस पर पानी फेंकने से स्थिति बिगड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रशासन की ओर से की गई साजिश है या कुछ बाहरी लोगों की करतूत, इसकी जांच होनी चाहिए। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, एडिशनल एसपी सुखनंदन राठौर ने कहा कि प्रदर्शनकारी बिना अनुमति के जुलूस की शक्ल में आए और पटेल चौक पर चक्का जाम करने की कोशिश की। कई बार रोकने के बावजूद उन्होंने बात नहीं मानी, जिसके चलते बल प्रयोग करना पड़ा। उन्होंने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर पानी पाउच फेंके गए, जिससे स्थिति बिगड़ी। इधर, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि कारोबारी प्रतिनिधि उनसे भी मिले हैं और उनकी मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि गाइडलाइन में किसी प्रकार की कमी या सुधार की आवश्यकता है, तो सरकार पुनर्विचार करेगी।
प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए पुलिस पहले से ही सतर्क थी और कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने वाले मार्गों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जैसे ही प्रदर्शनकारी पटेल चौक पहुंचे, पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। कई बार समझाइश देने के बावजूद भीड़ कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने पर अड़ी रही। स्थिति तब बिगड़ गई जब अचानक भीड़ में से कुछ तत्वों ने पुलिस पर पानी के पाउच फेंक दिए, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई।हालात नियंत्रण से बाहर होते देख पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। इसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हुए, जिन्हें तुरंत अस्पताल भेजा गया। घटना के तुरंत बाद इलाके में तनाव फैल गया, जिस पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने 7 से 8 लोगों को गिरफ्तार किया है, और अधिकारियों का कहना है कि संख्या आगे बढ़ सकती है।प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रियल एस्टेट कारोबारी पंकज मारकंडे ने बताया कि वे पिछले सात दिनों से शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे और प्रशासन को चक्का जाम की पूर्व सूचना भी दी गई थी। उनका कहना है कि पीछे से कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा पुलिस पर पानी फेंकने से स्थिति बिगड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रशासन की ओर से की गई साजिश है या कुछ बाहरी लोगों की करतूत, इसकी जांच होनी चाहिए। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, एडिशनल एसपी सुखनंदन राठौर ने कहा कि प्रदर्शनकारी बिना अनुमति के जुलूस की शक्ल में आए और पटेल चौक पर चक्का जाम करने की कोशिश की। कई बार रोकने के बावजूद उन्होंने बात नहीं मानी, जिसके चलते बल प्रयोग करना पड़ा। उन्होंने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर पानी पाउच फेंके गए, जिससे स्थिति बिगड़ी।
इधर, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि कारोबारी प्रतिनिधि उनसे भी मिले हैं और उनकी मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि गाइडलाइन में किसी प्रकार की कमी या सुधार की आवश्यकता है, तो सरकार पुनर्विचार करेगी।
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