दुर्ग जिले की मंडियों में इन दिनों ग्राहक तो दिख रहे हैं, लेकिन इनकी खरीददारी आधी हो गई है,वर्तमान में सब्जियों के भाव में आई तेजी ने लोगों का सारा बजट बिगाड़ दिया है.सब्जी मंडी में कोई भी सब्जी 40 रूपए से कम नहीं बिक रही है । इन सब्जियों में शहंशाह टमाटर बना हुआ है, इन दिनों टमाटर 80 से 100 रूपए किलो तक बिक रहा है.दुर्ग जिला टमाटर बाहुल्यता वाला इलाका माना जाता है। जिले की मंडियों में सिर्फ टमाटर ही नहीं बल्कि सब्जियां भी लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है । एक अनुमान के मुताबिक दुर्ग जिले में करीब 10 से 15 हजार एकड़ में टमाटर का उत्पादन किया जाता है। एक एकड़ में सीजन के दौरान करीब 200 क्विंटल तक टमाटर का उत्पादन होता है. राज्य सरकार की अनदेखी के चलते हर वर्ष बंपर टमाटर होने पर किसान उसे संरक्षित नहीं रख पाते और उन्हें इसे सड़कों पर फेंकना पड़ जाता है, वही टमाटर व्यवसाय और लोगों ने बताया , कि टमाटर की पैदावार कम होने की वजह से दाम बड़ी है।साथ ही गुजरात और राजस्थान में बाढ़ की वजह से फसल बर्बाद हो गई है,साथ ही धमधा का टमाटर अब पाकिस्तान और बांग्लादेश जा रहा है,एक महीने में स्थिति ठीक हो जाएगी।
दुर्ग जिले की मंडियों में इन दिनों ग्राहक तो दिख रहे हैं, लेकिन इनकी खरीददारी आधी हो गई है,वर्तमान में सब्जियों के भाव में आई तेजी ने लोगों का सारा बजट बिगाड़ दिया है.सब्जी मंडी में कोई भी सब्जी 40 रूपए से कम नहीं बिक रही है ।
इन सब्जियों में शहंशाह टमाटर बना हुआ है, इन दिनों टमाटर 80 से 100 रूपए किलो तक बिक रहा है.दुर्ग जिला टमाटर बाहुल्यता वाला इलाका माना जाता है। जिले की मंडियों में सिर्फ टमाटर ही नहीं बल्कि सब्जियां भी लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है ।
एक अनुमान के मुताबिक दुर्ग जिले में करीब 10 से 15 हजार एकड़ में टमाटर का उत्पादन किया जाता है। एक एकड़ में सीजन के दौरान करीब 200 क्विंटल तक टमाटर का उत्पादन होता है. राज्य सरकार की अनदेखी के चलते हर वर्ष बंपर टमाटर होने पर किसान उसे संरक्षित नहीं रख पाते और उन्हें इसे सड़कों पर फेंकना पड़ जाता है, वही टमाटर व्यवसाय और लोगों ने बताया , कि टमाटर की पैदावार कम होने की वजह से दाम बड़ी है।
साथ ही गुजरात और राजस्थान में बाढ़ की वजह से फसल बर्बाद हो गई है,साथ ही धमधा का टमाटर अब पाकिस्तान और बांग्लादेश जा रहा है,एक महीने में स्थिति ठीक हो जाएगी।
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