नगर निगम मुख्यालय परिसर में लगभग 25 लाख रुपए की लागत से बना डेढ़ टन का बायोगैस प्लांट रखरखाव के अभाव में कबाड़ में तब्दील हो चुका है। अब इस बायोगैस प्लांट का किसी तरह से उपयोग नहीं किया जा रहा है। नगर निगम मुख्यालय परिसर में लाखों रुपए की लागत से डेढ़ टन के बायोगैस प्लांट की स्थापना कुछ वर्ष पूर्व की गई थी। इस बायोगैस प्लांट का संचालन निगम मुख्यालय के समीप लगने वाली सब्जी मंडी से निकले सड़ी गली सब्जियों आदि से किया जाता था। बायोगैस प्लांट से निकली गैस की सप्लाई आसपास के चाय ठेले खोमचे वालों को की जाती थी। जिसके कनेक्शन आज भी लगे हुए हैं। कुछ समय तक यह कार्य सफलतापूर्वक चलता रहा। लेकिन इसके बाद बायोगैस प्लांट के रखरखाव को लेकर उदासीनता बरती जाने लगी। इसका संचालन कर रहे ठेकेदार को भी नगर निगम प्रशासन द्वारा पूर्ण भुगतान कर दिया गया था। जिसने किसी कारणवश बायोगैस के संचालन को ही बंद कर दिया। ठेकेदार के द्वारा बायोगैस का संचालन बंद कर दिए जाने के बाद निगम प्रशासन ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। जिसके फलस्वरूप बायोगैस प्लांट कबाड़ में तब्दील हो चुका है। इसका संचालन पूरी तरह से बंद है। इसमें लगे लाखों रुपए डूब चुके हैं। जिसमें किसी तरह का आर्थिक लाभ भी नगर निगम को नहीं प्राप्त हो सका। निगम परिसर की झाड़ियों के बीच खड़ा बायोगैस प्लांट अपनी असफलता की कहानी खुद ही बयां कर रहा है।
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