कवर्धा हिंसा : कांग्रेस बोली- प्रशासन से चूक हुई, लेकिन सुनियोजित थी घटना, भाजपा ने कहा- संप्रदाय विशेष को संरक्षण दे रही सरकार

कवर्धा/रायपुर। कवर्धा में रविवार को भड़की सांप्रदायिक हिंसा तो काबू में आ गई, लेकिन अब राजनीतिक दंगल शुरू हो गया है। कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे पर माहौल खराब करने का आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस की ओर से कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जिला प्रशासन की चूक को स्वीकार किया। लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि हिंसा सुनियोजित थी और इसके लिए बाहर से आकर लोग स्कूलों में ठहरे थे। वहीं दूसरी ओर भाजपा ने राजधानी में कवर्धा हिंसा को लेकर धरना दिया। इसमें पूर्व मंत्री ने कहा कि संप्रदाय विशेष के लोग शहर में नंगा नाच करते रहे, लेकिन प्रशासन ने कुछ नहीं किया। उन्होंने सरकार पर संप्रदाय विशेष के लोगों को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया।


छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार में कृषि मंत्री और सरकार के प्रवक्ता रविन्द्र चौबे ने पत्रकार वार्ता में कहा कि कवर्धा की हिंसा सुनियोजित थी। इसके लिए दुर्ग, बिलासपुर आदि से एक दिन पहले ही शहर में आए लोग स्कूलों में स्र्के थे। ऐसे सभी लोगों की पहचान की जा रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहले ही निर्देश दे चुके हैं कि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कुछ लोग दो व्यक्तियों की आपसी लड़ाई को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने पहले धर्मांतरण को मुद्दा बनाने का प्रयास किया और अब कवर्धा की हिंसा को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि वीडियो फुटेज के आधार पर दोषियों की पहचान की जा रही है।

दूसरी ओर शनिवार को भाजपा ने राजधानी में कवर्धा हिंसा और पार्टी पदाधिकारियों के खिलाफ दर्ज किए गए केस के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया। राजधानी के बूढ़ातालाब धरना स्थल पर पूर्व मंत्री व भाजपा प्रवक्ता राजेश मूणत ने कहा कि कवर्धा मामले में कांग्रेस सरकार पक्षपात कर रही है। कवर्धा में एक संप्रदाय विशेष के लोगों ने नंगा नाच किया। लेकिन सरकार ने 24 घंटे तक सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि सबको मालूम था कि झंडा किसने उतारा है। कांग्रेस हमेशा ही हिंदुओं के खिलाफ राजनीति करती है। कांग्रेस सरकार धर्मांतरण के मामले में भी इसी तरह का रवैया अपना रही है। कोई धर्मांतरण को अपना अधिकार बता रहा है तो कोई तलवारें लहरा रहा है। सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती और पीड़ितों से मिलने की कोशिश करने पर रोका जाता है।

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