अम्बरीश कुमार राय,भिलाईनगर.23/12/19 - सरकार व जिला प्रशासन ने भिलाई के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल को अनाथ छोड़ दिया है। न तो इस ओर पीडब्ल्यूडी का ध्यान है ना हीं प्रशासन का कोई सहयोग है। भिलाई निगम ने क्षेत्र की जनता को राहत के नाम पर मोर्चा संभाल रखा है। एक तरह से भिलाई निगम हीं सुपेला अस्पताल को संजीवनी देने का कार्य कर रही है। जानकारी के अनुसार लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल सुपेला की स्थिति बेहतर होने के बजाए और खराब होती जा रही है। न ही उपकरण काम कर रहे हैं न पर्याप्त डॉक्टर है। डॉक्टरों के अभाव में आए दिन अस्पताल में हंगामा होता है। अस्पताल में सिर्फ दो पुरुष डॉक्टर ही बचे हैं। सुपेला अस्पताल में पोस्टमार्टम भी शुरू हो गया है। उसके बावजूद डॉक्टरों की कमी लगातार डिमांड के बाद भी दूर नहीं हो पाई। पीडब्ल्यूडी ने पल्ला झाड़ाजिला प्रशासन हर बार बेहतर व्यवस्था बनाने का दावा करता है। कांग्रेस व भाजपा के दो-दो बड़े आंदोलन के बाद भी सिर्फ आश्वासन मिला। कहा गया कि स्वास्थ्य मंत्रालय से लगातार चिट्ठी पत्री की जा रही है। राज्य सरकार की तरफ से आज तक कोई जवाब नहीं आया है। बाद में संधारण आदि कार्य से पीडब्ल्यूडी ने भी लगभग हाथ खींच लिया। निगम के भरोसे चलता है कामसुपेला सरकारी अस्पताल की सारी व्यवस्था भिलाई निगम संभाल रहा है। संंधारण से लेकर साफ सफाई तक भिलाई निगम के कर्मचारी कर रहे हैं। इसके अलावा हर महीने सवा लाख रुपये का बिजली बिल का भुगतान भी भिलाई निगम ही कर रहा है। एंटी रैबिज दवा की सप्लाई भिलाई निगम द्वारा किया जाता रहा है। एक तरह से जिला स्वास्थ्य महकमे ने सुपेला अस्पताल को भिलाई निगम के भरोसे पर हीं छोड़ दिया है।
अम्बरीश कुमार राय,
भिलाईनगर.23/12/19 - सरकार व जिला प्रशासन ने भिलाई के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल को अनाथ छोड़ दिया है। न तो इस ओर पीडब्ल्यूडी का ध्यान है ना हीं प्रशासन का कोई सहयोग है। भिलाई निगम ने क्षेत्र की जनता को राहत के नाम पर मोर्चा संभाल रखा है। एक तरह से भिलाई निगम हीं सुपेला अस्पताल को संजीवनी देने का कार्य कर रही है।
जानकारी के अनुसार लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल सुपेला की स्थिति बेहतर होने के बजाए और खराब होती जा रही है। न ही उपकरण काम कर रहे हैं न पर्याप्त डॉक्टर है। डॉक्टरों के अभाव में आए दिन अस्पताल में हंगामा होता है। अस्पताल में सिर्फ दो पुरुष डॉक्टर ही बचे हैं। सुपेला अस्पताल में पोस्टमार्टम भी शुरू हो गया है। उसके बावजूद डॉक्टरों की कमी लगातार डिमांड के बाद भी दूर नहीं हो पाई।
पीडब्ल्यूडी ने पल्ला झाड़ा
जिला प्रशासन हर बार बेहतर व्यवस्था बनाने का दावा करता है। कांग्रेस व भाजपा के दो-दो बड़े आंदोलन के बाद भी सिर्फ आश्वासन मिला। कहा गया कि स्वास्थ्य मंत्रालय से लगातार चिट्ठी पत्री की जा रही है। राज्य सरकार की तरफ से आज तक कोई जवाब नहीं आया है। बाद में संधारण आदि कार्य से पीडब्ल्यूडी ने भी लगभग हाथ खींच लिया।
निगम के भरोसे चलता है काम
सुपेला सरकारी अस्पताल की सारी व्यवस्था भिलाई निगम संभाल रहा है। संंधारण से लेकर साफ सफाई तक भिलाई निगम के कर्मचारी कर रहे हैं। इसके अलावा हर महीने सवा लाख रुपये का बिजली बिल का भुगतान भी भिलाई निगम ही कर रहा है। एंटी रैबिज दवा की सप्लाई भिलाई निगम द्वारा किया जाता रहा है। एक तरह से जिला स्वास्थ्य महकमे ने सुपेला अस्पताल को भिलाई निगम के भरोसे पर हीं छोड़ दिया है।
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